सबकुछ लिखा नहीं गया है


                     क्या अपने कभी सोचा है, हम बहुत सारी बातें कहना चाहते हैं, समझना और समझाना चाहते हैं, लेकिन फिर भी ये पूरी तरह से हो नहीं पाता, 


इसके बहुत से कारण हैं, कई तो हमें मालूम होते हैं, और कई कारणों का पता ही नहीं है अब भी, लेकिन ऐसा होता है.

सबकुछ लिखा नहीं गया है, सबकुछ बोला भी नहीं जाता , बहुत कुछ है जो  

लिखा गया है बोला गया है, लेकिन फिर भी जो लिखा गया है वही सच है, ऐसा माना जाता है

अब आप इसे कहीं पर भी आज़मा कर देख लें , चाहे कोई कानून की किताब हो या फिर किसी विद्यार्थी की किताब या फिर किसी देश का संविधान. ये विचार मेरे अपने हैं , आपके विचारों से भिन्न हो सकते हैं, ये मैंने लिख तो दिया है, और आपने पढ़ भी लिया लेकिन मानने के लिए कम से कम आप विवश नहीं हैं.

आपका दिन शुभ हो


Originally posted by Sadhana Devi Chauhan

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